भला यह भी कोई बात हुई!
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विवेक दत्त मथुरिया
जब बात किसी बात पर हो रही हो, और कि
बात करते करते बात का अर्थ कुछ और निकले, उस बात को कौन सी बात माना जाए। बात बात की तो बात होती है। जब बात करते करते बात बदल जाये तो लोग कहते है कि बेकार की बात मत कर। बात तो बात की होती है। कोई भी बात बेकार की नहीं होती। हर बात का कोई न कोई मतलब या अर्थ होता है। जिसको जिस बात में कुछ अपना लाभ नजर आए उसे ही मतलब की बात कहते हैं। जिस बात से कोई अपना लाभ न हो, वही बात बेमतलब यानी बेकार की बात है। जब बात का अर्थ समझ में न आये तो उसे अर्थहीन बात कहते हैं। बताओ उस बात को क्या बात कहें, बात कुछ चल रही हो और पहुंचे कंही? ये भी कोई बात हुई ! बात हो रही थी पहलगाम के बदले की और बात निकली जाति जनगणना की।
लो, जी ! अब कर लो बात। यह भी कोई बात हुई भला, देखो लोग अब तरह तरह की बात कर रहे है। अब बात में से नई नई बात निकल रही हैँ। एक बात यह भी है कि जाति जनगणना की बात ने उन पत्रकारो के सामने इस बात का धर्म संकट खड़ा हो गया है कि जो पत्रकार चारण भाट की तरह कल तक टीवी डिबेट में जाति जनगणना के नुकसान गिना रहे थे अब उन्ही चारण भाटों को रोज जाति जनगणना के फायदे गिनाने होंगे। अब पत्रकार क्या करें जब बात आ पड़ी है बात तो बनानी होगी, क्योंकि बात तो बिगड़ी हुई थी, अब बात नहीं बनाएंगे तो उनकी बात बिगड़ जाएगी, इनकी बात बन जाएगी। बड़ी बात यह है कि पता नहीं जाति जनगणना की बात बिगड़ेगी या बनेगी ? ऐसा लगता है जो बात बिगड़ गयी है, उस बात को बनाने के लिए यह नई बात बनाई गयी है।
धर्म संकट तो उनके साथ ज्यादा है, जी बेबात ही कायदे की बात के पीछे डंडा लिए घूमते हैं। इनसे बात करने में ज्ञानी लोग भी पतली गली से निकलने में भलाई समझते हैं।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि जाति जनगणना के सरकारी ऐलान के बाद यह समझ मे नही आ रहा कि बधाई किस को दी जाए पक्ष को विपक्ष को ? जब बात जाति जनगणना की चल निकली है, तो बात आगे ही जाएगी। कहते हैं कि कमान से निकला तीर औऱ जुबान से निकली बात वापस नहीं आती है। कोई हवा उड़ता तीर हाथ में लेले तो घायल होना लाजिमी है। यह सियासी तीर है। इस बात की तस्दीक तो बाद में होगी। पर बात यह है कि सबको इंतजार उस बात का था और निकली ये बात। इस बात को क्या बात माना जाए, हिट विकेट या मास्टर स्ट्रोक?



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