शख्सियतः बच्चों के इलाज को पैसे नहीं थे, खड़ी कर दी 600 करोड़ की कंपनी
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मफतलाल अग्रवाल
जीवन में कोई घटना कब टर्निंग पॉइंट बन जाए, यह कहना असंभव है। एक हादसा जीवन की राह ही बदल देता है। नई राह पर मिली सफलता से बनी शख्सियत को समाज प्रेरणा के रूप में सम्मान देने लगता है। ब्रज की धरती पर एक ऐसे ही युवा की कहानी, जिसे संघर्ष और सफलता ने अद्वितीय बना दिया कृ नाम है पंडित शोभाराम शर्मा।
गांव की प्रधानी से शुरू हुआ सफर आज उन्हें सिविल निर्माण के एक सफल ठेकेदार के रूप में स्थापित कर चुका है। ब्रज में लोग उन्हें स्नेहपूर्वक “शोभराम ठेकेदार” के नाम से जानते हैं।
एक चुनौती बनी टर्निंग पॉइंट
ग्राम प्रधान रहते हुए जब सरकारी अफसरों और नेताओं की मनमानी से त्रस्त होकर ठेकेदारों ने ब्लॉक मुख्यालयों पर बनने वाले भवनों का निर्माण अधूरा छोड़ दिया, तब युवा प्रधान शोभराम ने उस कार्य को चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने अधूरा निर्माण कार्य समय से पूर्व पूरा कर दिया और अधिकारियों की नजरों में हीरो बन गए। यही घटना उनके जीवन की दिशा बदलने वाला मोड़ बन गई।
शोभराम शर्मा ने अपनी मेहनत, ईमानदारी और सूझबूझ के दम पर 600 करोड़ की कंपनी खड़ी कर राष्ट्रीय स्तर पर ब्रज का नाम रोशन किया।
साधारण से असाधारण तक
उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के छोटे से गांव भरनाकलां में 12 अक्टूबर 1970 को पंडित राधेश्याम शर्मा भगतजी एवं माता शांति देवी (संतो) के सबसे बड़े पुत्र के रूप में जन्मे शोभाराम जी एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते थे।
कक्षा 7वीं में पढ़ाई के दौरान ही उनका विवाह हो गया और मात्र 24 वर्ष की उम्र में वे ग्राम प्रधान भी बन गए।
1999-2000 के दौरान पंचायत योजना के अंतर्गत चौमुंहा सहित चार ब्लॉकों में मीटिंग हॉल के निर्माण कार्य ठप हो गए। अधिकारियों ने कार्य पूर्ण कराने की जिम्मेदारी शोभाराम शर्मा को सौंपी, जो उन्होंने अल्प समय में पूर्ण कर दी। प्रभावित होकर अन्य निर्माण कार्य भी उन्हें दिए गए। परंतु अन्य ठेकेदारों की शिकायतों के कारण उनके पेमेंट रोक दिए गए और वह लगभग 8 से 10 लाख रुपये के कर्ज में डूब गए।
हार नहीं मानी, बनाई अपनी कंपनी
कर्ज चुकाने के बाद भी उन्होंने ठेकेदारी जारी रखी और “एसआरएससी (SRSC) कंपनी” की स्थापना की। आज उनकी कंपनी उड़ीसा, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में एक्सप्रेस-वे, ब्रिज, सड़क निर्माण जैसे 400-400 करोड़ के प्रोजेक्ट संभाल रही है। कंपनी का कुल कारोबार 600 करोड़ रुपये से अधिक है।
धैर्य और भरोसे को बनाया ताकत
ठेकेदारी के शुरुआती दौर में आर्थिक संकट इतना बढ़ गया था कि जब बच्चों को चिकनपॉक्स हुआ, तो इलाज के लिए पैसे भी नहीं थे। एक मेडिकल स्टोर के मित्र ने डॉक्टर से दिखवाकर दवा दी, जिससे बच्चों की जान बची। भुगतान आने के बाद उन्होंने मित्र का कर्ज चुकाया। यह अनुभव उन्हें जिंदगीभर याद रहा।
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व्यवहार की शक्ति से खड़ी की सफलता
जब कर्जदार परेशान करने लगे, तो एक व्यापारी मित्र ने सलाह दी कि “कर्ज से मत घबराओ, जिनका पैसा देना है उनसे खुद जाकर मिलो, भरोसा दो।”
मित्र की सलाह पर शोभराम शर्मा ने सभी से मिलकर पैसा लौटाने का भरोसा जताया, और ईमानदारी से व्यवहार करते हुए अपना व्यापार दोबारा खड़ा किया।
सामाजिक सरोकार भी बड़ी पूंजी
मां के निधन के अंतिम संस्कार के बाद जब श्मशान स्थल पर फूल चुनने के लिए गए तो वहां कुत्तों को लौटते देखा, तो उन्हें गहरा आघात हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने गांव में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से पक्के श्मशान घाट का निर्माण करवाया। कोरोना काल में उन्होंने राहगीरों को भोजन, पानी, दवाएं, चप्पल तक वितरित कीं।
ईमानदारी का संकल्प
जिस ब्लॉक से उन्होंने ठेकेदारी शुरू की, आज उसी ब्लॉक की ब्लॉक प्रमुख उनकी पत्नी श्रीमती जमुना देवी हैं। वे और उनकी पत्नी विकास कार्यों में एक रुपया भी कमीशन नहीं लेते। शोभराम बताते हैं कि उनके पिता ने चुनाव लड़ाने की अनुमति इस शर्त पर दी थी कि कभी कमीशन नहीं लेंगे, और वे आज तक इस प्रतिज्ञा का पालन कर रहे हैं।
हजारों लोगों को दे रहे हैं रोजगार व भोजन
आर्थिक संकट के दौरान रोजी-रोटी के लिए अकेले जूझ रहे शोभाराम शर्मा, आज हजारों लोगों को रोजगार और लाखों लोगों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। वे गौ सेवा, संत सेवा, धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भी निरंतर आगे रहते हैं। उनके दरवाज़े आज भी हर वर्ग के लिए खुले रहते हैं।
संदेश और सफलता के सूत्र
मेहनत, ईमानदारी और सत्य की हमेशा जीत होती है।
बुरे वक्त में भी सकारात्मक सोच बनाए रखें।
संकट आने पर घबराएं नहीं, उसका डटकर सामना करें।
यह इन्टरव्यू शोभाराम शर्मा से व्यक्तिगत बातचीत कर आधारित है। इसकी कॉपी करना पूर्ण रुप से वर्जित है।



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