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मफतलाल अग्रवाल

मन के हारे हार है,मन के जीते जीत ... अगर इंसान के हौसलों बुलंद हों तो उसके लिए कोई हार मायने नही रखती है ऐसा ही राज्यसभा सांसद चौधरी तेजवीर सिंह के जीवन पर सटीक साबित हुआ जहां तीन बार लोक सभा सांसद चुनने के बाद चौथी बार सासंद बनने में असफल होने के बाद भी अपनी मेहनत जुनून के चलते कई महत्तपूर्ण पदों पर चयनित होने के बाद राज्य सांसद बनने में सफल हुए बल्कि उनके दो पुत्र एमबीबीएस डॉक्टर भी बनने में सफल हुए।                

 मथुरा जनपद के छोटे से गांव शाहपुर जाटान में किसान परिवार में चौधरी देशराज सिंह के परिवार में 2 दिसंबर 1959 में जन्मे चौधरी तेजवीर सिंह ने  बचपन में राजनेता बनने का स्वप्न देखा। जब वह कक्षा 08 वीं में थे तो उन्होंने अपने मकान के बाहर विधायक की नाम पट्टिका बनाकर अपने घर में रख ली। जिसे देखकर परिवार के लोग हंसी मजाक किया करते थे। प्रारंभिक पढ़ाई से लेकर इंटर तक की पढ़ाई मथुरा के चम्पा अग्रवाल एवं अमरनाथ विद्या आश्रम में हुई ग्रेजुएशन के लिए के.आर. कालेज मथुरा में दाखिला हुआ तो प्रथम वर्ष में ही उन्हें छात्र राजनीति का चस्का लगा और वह कालेज में चीफ प्रीफेक्ट के पद पर मनोनीत हो गए। द्वितीय वर्ष में ग्रेजुएशन के दौरान छात्र संघ के चुनाव में महामंत्री निर्वाचित हुए। इसके बाद 22 वर्ष की उम्र में 11 जुलाई 1981 में शादी कर दी गई। लेकिन राजनीति का जुनून कम नही हुआ 15 जून 1987 को जिला सहकारी बैंक मथुरा के  अध्यक्ष बनने में सफल रहे।

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लगातार 4 बार बैंक अध्यक्ष बनने के बाद वह विधायक बनने का ख्याब देखने लगे  उनका विधायक बनने का सपना तो पूरा नही हो सका। लेकिन वर्ष 1996 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मथुरा लोक सभा सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया। जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के वर्तमान मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री श्याम सुंदर शर्मा, पूर्व मंत्री सरदार सिंह को हराकर सांसद बनने में सफलता हासिल की। 13 माह बाद 1997 में पुनः भाजपा ने उन्हें  लोकसभा प्रत्याशी बनाया और वह जीतने में सफल रहे है। तीसरी बार 1999 में फिर से भाजपा ने मथुरा से लोकसभा प्रत्याशी घोषित किया और वह जीतने में सफल हुए। लेकिन 2004 के चुनाव मैं पुनः पार्टी ने लोक सभा प्रत्याशी बनाया गया  जिसमें वह कुंवर मानवेंद्र सिंह से परास्त हो गए। जीत का सिलसिला भले ही थम गया लेकिन पार्टी ने उन्हें जिलाध्यक्ष का ताज पहना दिया जिसमें पहली बार जहां मथुरा की तीन नागपालिकाओं पर जीत का परचम फहराने में सफलता हासिल की बल्कि पहली बार जनपद की चार विधानसभाओं पर पहली बार जीत का परचम लहराया। कहते हैं कि देर सबेर मेहनत अपना रंग जरूर दिखाती है यही चौधरी तेजवीर सिंह के राजनीतिक जीवन पर सटीक साबित हुआ जिसमें जहां पहली बार वह मथुरा जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने वहीं 2018 में वह पूरे उत्तर प्रदेश के बैंक चेयरमैन निर्वाचित हुए। जब उनका बैंक कार्यकाल खत्म हुआ तो उसके बाद उन्हें वर्ष 2024 में पार्टी ने राज्य सभा सांसद बना दिया जो आज तक बने हुए हैं।

जिद के सामने झुके परिवारीजन दिलानी पड़ी दो बार कार

चौधरी तेजवीर सिंह का स्वभाव जहां मधुर रहा है वहीं उनका अड़ियल रवैया भी परिजनों के लिए मुसीबत भरा रहा, बताया जाता है कि विधायक बनने का जुनून इस कदर हावी था जब परिवारजनों ने 11 वीं में दाखिला कराया तो वह पेट्रोल कार की मांग पर अड गए जिसका परिजनों ने विरोध किया लेकिन जिद के चलते उन्हें कार दिलाने पर मजबूर होना पड़ा। जब ग्रेजुएशन की पढ़ाई का वक्त  और छात्र संघ का चुनाव आया तो पुनः परिजनों के सामने डीजल कार की मांग कर दी।जिद पर अड़ने के कारण परिजनों को कार दिलाने पर मजबूर होना पड़ा। लेकिन वह छात्र संघ के महामंत्री पद का चुनाव जीतने में सफल हुए। और राजनीति में पर्दापण किया। जो विधायक तो नही बन सके लेकिन तीन बाद लोकसभा सांसद एवं वर्तमान में राज्य सभा सांसद बनने में जरूर सफल साबित हुए।

ससुर बने 5 बार विधायक, बच्चों को रखा राजनीति से दूर


चौधरी तेजवीर सिंह का विधायक बनने का सपना भले ही आज तक पूरा नही हो सका लेकिन उनके श्वसुर चौधरी बदन सिंह उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीकरी विधान सभा क्षेत्र से 05 बार विधायक बनने में सफल रहे हैं। खास बात तो यह कि उनके तीन पुत्र हैं जिनमें से दो पुत्र राघवेंद्र सिंह चौधरी  एमबीबीएस  एमडी डॉक्टर हैं। जब कि दूसरे पुत्र कुनाल चौधरी एमबीबीएस करने के बाद एम डी कर रहे हैं जिसमें जब कि तीसरा सबसे बड़े पुत्र अमित चौधरी खेती खलिहान के साथ सामाजिक,व्यापारिक कार्यों में  व्यस्त रहते हैं। जब उनकी बेटी मीनाक्षी चौधरी के पति श्री पुष्पेंद्र चौधरी इनकम टैक्स कमिश्नर हैं ।

सफतला के सूत्र-
राजनीति कोई व्यापार नहीं है। यह एक जनसेवा है। जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी से निभाया।
जीवन में सकारात्मक सोच बनाये रखनी चाहिए, चाहे कोई भी संकट आये।
कर्मठता, ईमानदारी, सत्यता से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
दल बदल की जगह कार्यकर्ताओं को हमेशा पार्टी के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए।

 

यह साक्षात्कार सांसद चौ. तेजवीर सिंह से व्यक्तिगत बातचीत पर आधारित है, इसकी कॉपी व प्रसारित करना पूर्ण रुप से वर्जित है

 

 

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