ये आकाशवाणी उत्तर प्रदेश है.सूबे के 22 केन्द्रों को रिले करने की तैयारी
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ये आकाशवाणी उत्तर प्रदेश है...
-सूबे के 22 केन्द्रों को रिले करने की तैयारी
- सभी स्टेशनों की एक सभा को रिले करने को भेजा गया फिक्स प्वाइंट चार्ट
-प्रसार भरती की क्लस्टर हैड नीति से लटकने लगे कलाकारों के भुगतान
ये आकाशवाणी का मथुरा -वृन्दावन केन्द्र है की जगह अब आप ये आकाशवाणी उत्तर प्रदेश है सुनेंगे । अब आप समूचे उत्तर प्रदेश में एक ही गाना सुन पाएंगे। आप की रुचि चाहे जो रहे, स्टेशन बदल कर भी आपको कुछ हासिल नहीं होगा।
मध्यप्रदेश में ऐसा हो चुका है। यह सब कलपुर्जे ठीक करने वाले यानी इंजीनियरिंग स्टाफ की वजह से हो रहा है। उन्हें आकाशवाणी में खपाने के लिए बगैर पद के क्लस्टर हैड जैसे पद सृजित किए गए हैं। उनको वित्तीय अधिकार मिलने के बाद से कलाकारों को कयी-कयी माह में भुगतान के लिए परेशान होना पड़ रहा है । आकाशवाणी के एनाउंसर कंपेयरों को भी तीन से चार माह में भुगतान दिया जा रहा है। यह सब बजट की कमी न होने पर हो रहा है।
आकाशवाणी, यानी देव उद्घोषणा। इस नाम को सार्थक करते हुए आकाशवाणी ने अपनी स्थापना से अब तक सम्बंधित क्षेत्र की संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने और वहां की कला-विधाओं के कलाकारों को उत्साहित करने, उन्हें अवसर देने, जन- जन तक उनकी आवाज़ पहुंचाने और उनका यथोचित आर्थिक और सामाजिक सम्मान करने का सार्थक कार्य किया। परिचर्चा, वार्ता, क्षेत्र के लोक गीत और फ़िल्म संगीत... ये सब रेडियो के माध्यम से चलते फिरते काम करते सुनता है, तो उसे लगता है, वह पूरे संसार से जुडा है। अब सालों से देश के प्रधानमंत्री स्वयं आकाशवाणी पर मन की बात के द्वारा लोगों को जोड़ रहे हैं। एक तरफ सरकार ने कुम्भ की कवरेज के लिए कुम्भ वाणी एफएम रेडियो की शुरुआत की है वहीं उत्तर प्रदेश के 22 केन्द्रों को रिले पर डालने की नीति पर काम चल रहा है। मथुरा केन्द्र के एनाउंसर, कंपेयर व कलाकार इसके विरोध में आन्दोलनरत हैं। उन्होंने सांसद हेमा मालिनी, राज्य सभा सांसद चौ तेजवीर सिंह, सूबे के गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, विधायक मेघश्याम सिंह, विधायक राजेश चौधरी, विधायक पूरन प्रकाश आदि से सूचना प्रसारण मंत्री को पत्र लिखवाया है। दिलीप कुमार यादव, देवराज दीक्षित, संजय सारस्वत,मनीष सक्सेना, अनुराग पाण्डेय, वीरेंद्र चौधरी, चंद्रा खत्री, अंजू मिश्रा, रश्मी शर्मा आदि ने भी प्रसार भारती अफसरों का मेल भरो आंदोलन चला रखा है। हर दिन प्रसार भारती को मेल किए जा रहे हैं।
आकाशवाणी ने दिखाया प्रगति पथ
पद्मश्री स्वामी राम स्वरूप शर्मा, पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया, फिल्मी पटकथा लेखिका डा अचला नागर, राष्ट्रीय कवि मनवीर मधुर, पूनम वर्मा, वंदना सिंह, गीतांजलि शर्मा ,डा सीमा मोरवाल, जगदीश ब्रजवासी, नाट्यविद लोकेंद्र नाथ कौशिक, दामोदर शर्मा, अलका राजेश सरीखे अनेक कलाकारों की प्रगति में आकाशवाणी हमराह रही है।
1967 में स्थापित हुआ आकाशवाणी का मथुरा-वृन्दावन केन्द्र
मथुरा। आकाशवाणी के मथुरा वृन्दावन केन्द्र की स्थापना आगरा एवं अलीगढ से पूर्व मथुरा में हुई। स्थानीय सांसद चौधरी दिगंबर सिंह की की पूरी साहनुभूति रही। भरतपुर के सांसद एवं तत्कालीन सूचना प्रसारणमंत्री राज बहादुर जी अनेक स्थानीय लोग मिले तब जाकर 1967 में संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के लिए ही इस केन्द्र को स्थापित किया गया।
एक सभा बंद होने का ब्रज पर प्रभाव
मथुरा। प्रात: कालीन सभा में ब्रज माधुरी, ब्रज वार्ता, रासलीला, नौटंकी, हवेली संगीत, ब्रज लोकगीत, ब्रज दर्पण जैसे कार्यक्रम जाते हैं। इनमें से कई कार्यक्रमों की उपयोगिता सुबह के समय ही है। लखनऊ में बैठा कोई प्रस्तोता इनकी कंपेयरिंग ब्रज भाषा में उतनी सुंदर शायद ही कर पाए जितनी स्थानीय व्यक्ति कर सकता है।
चंद घंटे में सिमट जाएंगे ब्रज कार्यक्रम
मथुरा। अभी तक आकाशवाणी के मथुरा वृन्दावन केन्द्र से करीब 15 घंटे का प्रसारण होता है। इसमें से दो से ढाई घंटे ही प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय प्रसारण जाता है। बाकी का संपूर्ण समय ब्रज के कंपेयर एवं एनाउंसरों द्वारा ही कार्यक्रमों का प्रस्तुतीकरण किया जाता है। लखनऊ से एक सभा का रिलो होने से स्थानीय कला, कलाकार, एनाउंसर एवं कंपेयरों के काम के अवसरों में तो कमी आएगी ही ब्रज संस्कृति का इससे कहीं ज्यादा नुकसान होगा।
प्रदेश सरकार का संस्कृति संरक्षण पर जोर
मथुरा। उत्तर प्रदेश सरकार का ब्रज संस्कृति के संरक्षण संवर्धन पर जोर है। इसी लिए योग सरकार ने ब्रज तीर्थ विकास का गठन कर अनेक तरह की योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इधर दिल्ली में बैठे प्रसार भारती के अफसर ब्रज संसकृति संरक्षण संवर्धन को स्थापित आकाशवाणी के अस्तित्व के लिए चुनौती बन रह हैं।
क्यों रिले पर लाए जा रहे आकाशवाणी केन्द्र
मथुरा। आकाशवाणी केन्द्रों को रिले केन्द्र बनाने के लिए भी प्रसार भारती के आला अफसर जिम्मेदार हैं। वह सरकार की नजर में कमाऊ पूत बनकर अपनी पीठ थपथपाने वाला काम कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो अभी तक हर आकाशवाणी केन्द्र से बजने वाले फिल्म संगीत की रायल्टी करीब 18 करोड बनती है। प्रसार भारती के अफसर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को यह दिखाना चाहते हैं कि उनके एक निर्णय से करोडों की बचत हो गई लेकिन इससे समाज को कितना नुकसान हुआ इसे वह नहीं बताना चाहते। रेडियो आज भी सुदूर देहात तक सुना जाता है। यदि ऐसा न होता हो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मन की बात करने रेडियो पर न आते। फिल्म संगीत की लायल्टी ही बचानी है तो उसे निर्धारित समय में पूरे देश के हर स्टेशन पर एक साथ रिले किया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। दूसरा तर्क अच्छे कार्यक्रम निर्माण का दिया जा रहा है जबकि कमी केन्द्र पर प्रोग्राम सेक्शन में एक ही आदमी है। दशकों से भर्ती नहीं हुई। असायनी ही केन्द्र चलवाने में मददगार बने हुए हैं।
हजारों कुशल लोग फिर भी कर्मचारियों की कमी
मथुरा। आकाशवाणी केन्द्रों पर कार्यक्रम निर्माण से जुडे परमानेंट स्टाफ की कमी है। मथुरा केन्द्र पर प्रोग्राम सेक्शन में तीन ही परमानेंट लोग हैं लेकिन यहां असायनी कहे जाने वाले एनाउंसर एवं कंपेयरों की तादात करीब 50 है। यह लोग कार्यक्रम निर्माण, डबिंग, एडिटिंग, मिक्सिंग, प्रस्तुतीकरण सरीखे सभी काम स्टूडियो से लेकर फील्ड तक हर जगह करते हैं। इनकी तादात हर स्टेशन पर पर्याप्त है लेकिन इन लोगों को एक फिक्स पेमेंट पर आज तक नहीं लगाया गया। लोग 30-30 साल आकाशवाणी पर काम करते रहे लेकिन उन्हें किसी श्रेणी का कर्मचारी नहीं माना गया। जब प्रसार भारती के पास कुशल लोग ही नहीं है तो केन्द्रों को रिले पर डालकर वह बेहतर कार्यक्रम कैसे प्रस्तुत कर पाएंगे। कार्यक्रम निर्माण कौन करेगा। असायनी कहे जाने वाले लोगों के हर माह अधिकतम 6 ड्यूटी में कमी होगी तो वह भी आकाशवाणी का साथ छोड़ देंगे। रिले रुकने से न तो असायनी परमानेंट होंगे न उनका खास भला होगा लेकिन स्थानीय विविधताएं खत्म हो जाएंगी। उन्हें प्रस्तुत करने का मंच खत्म हो जाएगा।
क्या है समस्या
-प्रसार भारती कर्मचारियों की कमी के चलते समय समय पर नीतियां बदलती रहती है।
-उत्तर प्रदेश के केन्द्रों की प्रात:कालीन सभा को रिले करने की तैयारी इसी लिए है।
-सुबह की सभा बंद होने से परमानेंट स्टाफ को केन्द्र पर जल्दी नहीं आना होगा ।
-सभी केन्द्रों पर 90 फीसदी काम कर रहे हैं असायनी कंपेयर-एनाउंसर।
-कंपेयर-एनाउंसर फील्ड से लेकर स्टूडियो तक का जानते हैं सारा काम।
-महीने से अधिकतम छह दिन ही बुलाए जाते हैं कंपेयर-एनाउंसर।
-पूर्व में आकाशवाणी के रिटायर लोगों को भी कान्ट्रेक्ट पर रखा जाता था।
-अधिकतम छह ड्यृटी के आदेश के बाद उन्हेंने भी पेंशन देने वाले संस्थान से पल्ला झाडा।
-एनाउंसर-कंपेयर को एक ड्यूटी का मिलता है दो हजार रुपए भुगतान।
-क्लस्टर हैड और एबीएस सिस्टम से भुगतान होने से कई कई माह में होता है भुगतान।
-पूर्व में वार्ताकार की वार्ता खत्म होते ही मिल जाता था भुगतान का चैक।
-बजट की कमी नहीं फिर भी कलाकार, असायनी व आफिस के बिल भी कयी महीनों में होते हैं पास।
-स्वर परीक्षा, ट्रेनिंग, बीच बीच में असायनी कंपेयर-एनाउंसरों की ली जाती है सक्रीनिंग परीक्षा ।
-पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने तीन साल पूर्व असायनियों के नियमितीकरण का लोकसभा में दिया जवाब।
-मंत्री पद से हटते ही प्रसार भारती के अफसर अपने ही मंत्री के कथन से हट गए पीछे।
-अनेक केन्द्रों पर फिक्स पेमेंट पर नए लोगों को किया जा रहा भर्ती, कंपेयर-एनाउंसरों को मौका क्यों नहीं।
क्या है समाधान
-असायनी कहे जाने वाले कंपेयर-एनाउंसरों को 30-40 हजार रुपए महीने पर किया जाए फिक्स।
-परीक्षा मानकों के अनुरूप पात्र अनुभवी कंपेयरों को वरीयता के आधार पर मिलो स्मार्ट पेमेंट व जॉब गारंटी।
- कुशल लोगों को काम के अवसर देने से बढेगी काम की रफ्तार, बनेंगे गुणवत्ता युक्त कार्यक्रम।
-छोटे छोटे सैटअप में करोडों कमा रहे लोग, 260 से ज्यादा देश में रेडियो स्टेशनों का ढांचा बचाने की जिम्मेदारी हो फिक्स।
- भुगतान की लचर व्यवस्था ठीक करने को स्थानीय केन्द्रों को ही मिले भुगतान करने का अधिकार ।
-रेडियो के विज्ञापन विभाग को चुस्त दुरुस्त किए जाने की जरूरत।
-अनुभवी क्षमतावान लोगों को बारी बारी से अवसर की गारंटी से आकाशवाणी को मिलेगी नई गति।
-गैर जरूरी इंजीनियरिंग स्टाफ को ट्रेनिंग देकर अन्य कार्यों में लगाया जाए।
-गैर अनुभवी लोग कार्यक्रम निर्माण की नीतियों से हों अलग।
इंटरेक्टिव
दिलीप कुमार यादव, कंपेयर किसानवाणी कार्यक्रम
ब्रजवासियों के प्रांणों में ब्रज संस्कृति बसी है उसी तरह आकाशवाणी बसी है। ब्रज भाषा और ब्रज संस्कृति आदि कालीन हैं। इनको क्षति पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किसी कीमत पर असहनीय है। इस प्रयास को विफल करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। कलाकार, साहित्यकार, कृष्ण भक्तों को साथ लेकर आन्दोलन किया जाएगा। ब्रज के कार्यक्रमों की कटौती वाली सोच को समूल नष्ट करने का करने के लिए समस्त ब्रजवासी तैयार हैं। प्रसार भारती के अफसरों की बुद्धि शुद्धि को यज्ञ और आन्दोलन दोनों उग्रतम किए जाएंगे। यदि आकाशवाणी के मथुरी-वृन्दावन केन्द्र की किसी भी सभा को रिले किया गया तो हर संभव विरोध किया जाएगा।
जगदीश ब्रजवासी लोक कलाकार
यह भूमि भगवान कृष्ण की भूमि है। यहां कंस जैसे बलशाली की नहीं चली तो प्रसार भारती के अफसरों की क्या खाक चलगी। प्रसार भारती को अपनी नीति में मथुरा को लेकर बदलाव करना होगा। यहां के प्रसारों को रिले नहीं होने दिया जाएगा। लोक कलाकार इसका पुरोज विरोध करेंगे। हर कालाकार अपने अपने संपर्क वाले अफसरों व राजनेताओं के माध्यम से विरोध प्रदर्शन के लिए संकल्पित होकर काम करेगा।



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